Love Shayari – लव शायरी

Love Shayari लव शायरी

आजा छुपा लूं तुझे अपनी बाँहों में
कर दूँ मदहोश तुझे इन पनाहों में
दिल से दिल का रिश्ता बनाये हम
क्या रखा जुदाई की ठंडी आहों में

तेरे मेरे प्यार का खिल जायेगा चमन
इस कदर हो जाये एक जान दो बदन
खूब करे प्यार हल्का हो तन और मन
अटूट बना ले आज हमारे प्यार का बंधन

Love Shayari
Love Shayari

जमाने के लबों पर हैं चर्चा
प्यार का हमारे बंट गया पर्चा
मजा आता हैं सुनकर फ़साना
लैला मजनू का मिल गया दर्ज़ा

बदनाम मैं तेरे प्यार में यूँ हो जाऊंगी
हदें इस तरह से प्यार में कर जाऊंगी
संभाल कर रखना ये लाल दुपट्टा मेरा
दुल्हन बनकर तेरे आंगन में आऊंगी

प्यार की सीमा नहीं हैं सुना करती थी
खुद करूंगी मोहोब्बत चाहा करती थी
मिले जब तुम मुझे तो रहा होश नहीं
तेरे सपनों में खोकर ही जिया करती थी

चाँद सितारे गवाह हैं तेरी मोहोब्बत के
जमाने में रास्ते कई है यूँ तो इबादत के
तू ही देवता हैं मेरे खातिर इस जीवन में
सांस लेना नहीं हैं बिना तेरी इजाजत के

इश्क़ आसान नहीं सब कहते हैं
हम बस तेरी उल्फत में ही रहते हैं
तेरा प्यार ही मंजिल हैं मेरी खातिर
इसीलिए जमाने के ताने हम सहते हैं

दिल दे बैठे हैं तुझको ऐ मेरे सनम
करों कबूल तुझे सौंप दिया जीवन
सुर्ख होंठों पर तेरा नाम आता हैं
सिहर उठता हैं मेरा ये गुल बदन

बंद आँखों से भी प्यार नजर आता हैं
मुस्कुरा देते हो मेरा दिन गुजर जाता हैं
खड़ा रहता हूँ इंतजार में के जब आये तू
एक पल की तरह पूरा पहर उतर जाता हैं

कहो ना प्यार है, मुझे क्यों तड़पाते हो
चुपचाप रहके क्यों बिजलियाँ गिराते हो
लिपट जाओ आकर बदन से मेरे इस तरहा
दूर रहकर क्यों इश्क़ अगन में झुलसाते हो

Love Shayari – लव शायरी

कल मिलोगे तो बाँहों में भर लुंगी तुझे
दिल के पिंजरे में यूँ कैद कर लुंगी तुझे
हो जाओगी मदहोश लिपट के मुझसे
होंठो का गुलाबी जाम पिला दूंगी तुझे

फूलों से तेरी मांग सजा दूंगा
जिंदगी भर तुझे वो फ़िज़ा दूंगा
आ जा मेरी बांहो में मेरे सनम
हर एक गम को मैं दूर हटा दूंगा

चाँद से चकोर करती हैं जैसे
प्यार करूंगा तुझे मैं भी ऐसे
बांहों में निकलेगा दिन मेरा
रात भर देखूंगा चेहरा तेरा

भीगा भीगा सा ये दिसंबर हैं
भीगी भीगी सी यह तन्हाई हैं
इन किताबों में दिल नहीं लगता
हमको सजनी की याद आई हैं

सो जाऊं तेरे पहलू में मन करता है
मेरी जान मिलने को दिल तरसता हैं
जुदाई के जख्म ये अब न सहे जाते हैं
मिलने की चाह में आशिक तड़पता हैं

इश्क़ का जाम पिलाया तूने मुझको
आशिक इस कदर मदहोश हुआ
पाना हैं तुझको चाहे मरना भी पड़े
इस हद तक दिल सरफरोश हुआ

सारे जहाँ की खुशियां तुझे मिल जाए
राहों से कांटे तेरे सब ये निकल जाए
खिला दो फूल तुम पत्थर में भी सनम
गिरते को थामो तो वो भी सम्भल जाए

तेरे प्यार की खुशबू से महका आंगन
लहरा के चलती हो यूँ जब भी आँचल
इश्क़ तेरा इस कदर बरसता हैं सनम
सावन में बरसता हैं जैसे कोई बादल

तुमसे प्यारा ना दुनिया में कोई मंजर
दिल की दुआ हो या तुम कोई गजल
बच ना पाऊ तेरी अदाओ से सनम
चलाती हो दिल पे नजरों के खंजर

अपने प्यार की, पनाहों में रख लो
दिल में जगह दो, बांहो में रख लो
हम तो तकते हैं, तुझे सुबह शाम
तुम भी जरा निगाहें करम रख लो

रब्ब से माँगा हैं तुझे ऐ मेरे हसीन सनम
अपनी जुल्फों की मुझे थोड़ी सी हवा दे दे
बड़ी सिद्द्त से इन्तजार तेरा मैं करता था
प्यार ठुकराना नहीं, तू भी मुझे हाँ कह दे

Karan Deswal

I am a song lover from Delhi India

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2 Responses

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